Postmortem क्या है और क्यों किया जाता है ?

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Medical field में एक बहुत ही जरुरी शारीरिक जांच होती है– autopsy (शव परीक्षा) या Postmortem examination (पोस्टमार्टम), जिसके जरिये मौत के कारणों को पता लगाया जाता है। सामान्य मृत्यु की स्थिति में इसकी आवश्यकता नहीं होती है लेकिन सन्देहजनक स्थिति में हुयी मौत की गुत्थी सुलझाने में ये एक अहम जांच होती है। पोस्टमार्टम पुलिस या जाँच एजेंसी की जाँच का अहम् हिस्सा होता है | 

पोस्टमार्टम करने के लिए अलग तरह के एक्सपर्ट्स होते हैं जिन्हें पैथोलॉजिस्ट्स या विकृतिविज्ञानी कहा जाता है जो सामान्य डॉक्टर ही होते हैं लेकिन इन कार्यों में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त होता है। पोस्टमार्टम मृत्यु के 6 से 10 घंटे के भीतर किया जाना चाहिए क्योंकि उसके बाद शव जल्दी ख़राब होने लगता है।

पोस्टमार्टम दो चरणों में होता है। पहले चरण में शव का बाहर से निरीक्षण किया जाता है ताकि शरीर के सामान्य विकास, स्वास्थ्य, लिंग, त्वचा का रंग, अंगों की सूजन, मारपीट की स्थिति में शरीर पर निशान जैसी चीज़ों को नोट किया जाता है। दूसरे चरण में शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे आहार नलिका, आमाशय, खून नलिका, लीवर, किडनी का अलग-अलग परीक्षण करना होता है।

पोस्टमार्टम करने से पहले ये जरुरी है कि Doctor किसी परिजन या नजदीकी व्यक्ति या पुलिस से लिखित मे सहमति लेता है। पोस्टमार्टम में शरीर का बारीकी से निरीक्षण किये जाने के बाद मौत के कारणों का संकेत मिलता है जिसके आधार पर मौत की गुत्थी सुलझायी जाती है

रात में क्यों नहीं किया जाता?

अक्सर ऐसे कई सवाल मन में आते रहते हैं, जिनका जवाब मिलना थोड़ा मुश्किल सा होता है. लेकिन नामुमकिन नहीं. ऐसा ही एक सवाल यह भी है कि आखिर शवों का पोस्टमॉर्टम दिन में ही क्यों किया जाता है, रात में क्यों नहीं? तो आइए जानते हैं इसके बारे में…

पहले आप यह जान लीजिए कि आखिर पोस्टमॉर्टम क्यों किया जाता है? दरअसल, बता दें कि पोस्टमॉर्टम एक प्रकार का ऑपरेशन होता है, जिसमें शव का परीक्षण होता है. शव का परीक्षण इसलिए किया जाता है, ताकि व्यक्ति की मौत के सही कारणों की जांच हो सके. बता दें कि पोस्टमॉर्टम के लिए मृतक के सगे-संबंधियों की सहमति अनिवार्य होती है. लेकिन कुछ मामलों में Police Officer भी पोस्टमॉर्टम की इजाजत दे देते हैं, जैसे की हत्या मामले में.

प्राप्त मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यक्ति की मौत के बाद छह से 10 घंटे के अंदर ही पोस्टमॉर्टम किया जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इससे अधिक समय होने के बाद शवों में प्राकृतिक परिवर्तन, जैसे कि ऐंठन होने लगती है और शवों का पोस्टमॉर्टम करने का समय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के बीच का ही होता है. बता दें इसके पीछे वजह यह है कि रात में tubelight या LED की light में चोट का रंग लाल के बजाए बैंगनी दिखाई देने लगता है और फॉरेंसिक science में बैंगनी रंग की चोट का कोई भी उल्लेख नहीं मिलता है. एक धार्मिक कारण यह भी है कि कई धर्मों में रात को अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है, इसलिए कई लोग मृतक का पोस्टमॉर्टम रात में नहीं करवाते हैं. |