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Jaipur का name गुलाबी नगर कैसे पड़ा

जब जयपुर की स्थापना हुई तब जयपुर का नाम सवाई जयसिंह के नाम पे ‘सवाई जयनगर’ रखा जो बाद में ‘सवाई जैपुर’ और अंततः आम बोलचाल में और भी संक्षिप्त हो कर ‘जयपुर’ के रूप में जाना गया लेकिन भारतीय शिल्पकला के विशेषज्ञ सवाई जयसिंह की दुर्लभ तरकीब ने जयपुर को भारत के इतिहास मे गुलाबी नगर से शुभोभित किया | आज देश-विदेश के कोने-कोने में जयपुर को गुलाबी नगर (Pink City) के नाम से जाना जाता है।

जयपुर ने 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि की। इसके साथ ही जयपुर के आधुनिकीकरण का दौर भी शुरू हो गया।

वर्ष 1876 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट जयपुर आने वाले थे। उस समय जयपुर के महाराजा सवाई रामसिंह इनकी तैयारियों में जुटे थे। इनके स्वागत के लिए पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था। शहर की सड़कें साफ कर उनके किनारे फूल-पत्तियां से सुसज्जित गमले  लगाये जा रहे थे |

महाराजा सवाई रामसिंह के मन में एक तरकीब सूझी कि क्यों न पूरे शहर को एक रंग में रंग दिया जाए। फिर उन्होंने उच्च सलाहकारों से इस बात की मंत्रणा की और परकोटे में स्थित पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंग दिया। उसके बाद से यह शहर गुलाबी हो गया |

दरअसल जयपुर की स्थापना के 100 साल से भी ज्यादा समय बाद इस नगर को गुलाबी नगर की संज्ञा दी गई।

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